Dhanteras 2023: धनतेरस कि पूजा कैसे करें ? : परंपरागत विधी और कथा

                


धनत्रयोदशी पूजा हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण उत्सव है जो भगवान धनवंतरी को समर्पित है। यह पूजा दिवाली से दो दिन पहले मनाई जाती है और इसमें लोग धनवंतरी भगवान को धन, सुख, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य के  लिए  प्रार्थना करते हैं। इस पूजा का विधान बहुत ही परंपरागत होता है और इसकी कथा सभी धर्मग्रंथों में लिखी हुई है। आज  हम आपको धनत्रयोदशी पूजा के विधि, महत्व और कथा के बारे में विस्तार से बताएंगे, ताकि आप इस उत्सव को और अधिक धार्मिक एवं सामाजिक महत्व में मना सकें।

१. परिचय: धनत्रयोदशी पर्व के बारे में

धनत्रयोदशी पूजा, जिसे हम धनत्रयोदशी या धनतेरस के नाम से भी जानते हैं, हिन्दू धर्म में महत्वपूर्ण एक पर्व है। यह पर्व देवउत्थानी एकादशी के दिन आता है, जो कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। धनत्रयोदशी का अर्थ होता है "धन" यानी धन की प्राप्ति और "त्रयोदशी" यानी तेरहवीं तिथि।

धनत्रयोदशी पूजा को लोग धन और समृद्धि की प्राप्ति के लिए करते हैं। इस दिन, विशेष रूप से धन और लक्ष्मी की पूजा की जाती है और इसे धनत्रयोदशी कथा के साथ संयोजित किया जाता है। इस पर्व के दौरान, लोग धनत्रयोदशी व्रत रखते हैं और माता लक्ष्मी की कृपा को प्राप्त करने के लिए विशेष प्रार्थनाएं करते हैं।

२. धनत्रयोदशी के महत्वपूर्ण धार्मिक संस्कार

धनत्रयोदशी, हिन्दू धर्म में महत्वपूर्ण धार्मिक संस्कार है जो हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस उत्सव को धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है, जो त्रयोदशी तिथि के दिन प्रतिवर्षी आता है। धनत्रयोदशी पूजा का महत्व बहुत ऊँचा माना जाता है, और इसे सत्यनारायण कथा के साथ मनाने की परंपरा भी है।
धनत्रयोदशी के दिन लोग भगवान विष्णु और गोवर्धन पूजा करते हैं। यह पूजा हरिद्वार, वृंदावन, गोवर्धन, मथुरा जैसे तीर्थ स्थलों में बहुत धूमधाम के साथ मनाई जाती है। इस दिन लोग विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र का पाठ करते हैं और सत्यनारायण व्रत करते हैं। यह व्रत धन और समृद्धि की प्राप्ति के लिए किया जाता है, और इसे विशेष धार्मिक निष्ठा और आस्था के साथ मनाना चाहिए।

३. परंपरागत विधि: धनत्रयोदशी पूजा की तैयारी

धनत्रयोदशी पूजा का आयोजन करने से पहले, आपको इस पवित्र अवसर की तैयारी करनी होगी। यह पूजा एक परंपरागत आधार पर आयोजित होती है और इसे पूरी विधि के साथ करना महत्वपूर्ण होता है। यहाँ हम आपको इस पूजा की तैयारी के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम बताने जा रहे हैं:




१. सामग्री की तैयारी: पूजा के लिए सभी आवश्यक सामग्री को तैयार करें। इसमें धनत्रयोदशी व्रत के लिए विशेष भोजन, दीपक, धूप, लौंग, इलायची, सुपारी, कपूर, गंगाजल, मधु, तुलसी के पत्ते, अक्षता, रोली, आदि शामिल हो सकते हैं। सामग्री को सभी प्रयोग के लिए तैयार रखें और उन्हें सुरक्षित स्थान पर संयोजित करें।

२. पूजा स्थल की सजावट: पूजा स्थल को धनत्रयोदशी के लिए सुंदरता से सजाएं। इसमें मंदिर की सजावट, पूजा की थाली, अष्टद्रव्य, और देवी-देवताओं के मूर्तियों को संयोजित करें।

४. पूजा का आयोजन: धनत्रयोदशी पर्व की पूजा कैसे करें

धनत्रयोदशी पर्व का पूजा आयोजन करना एक महत्वपूर्ण पहलू है। इस दिन पूजा करके आप धन, समृद्धि और सुख की प्राप्ति की कामना कर सकते हैं। यहां हम आपको धनत्रयोदशी पर्व की पूजा करने का एक परंपरागत विधि और कथा के बारे में बताएंगे।

१. तैयारी: पूजा की तैयारी करने से पहले, साफ-सुथरी और शुद्ध स्थान का चयन करें। एक छोटा पूजा स्थान या मंदिर बनाएं जहां आप धनत्रयोदशी पूजा कर सकें। इसके साथ ही, पूजा के लिए सभी आवश्यक सामग्री जैसे कि दीप, अगरबत्ती, पुष्प, फल, पान, सिन्दूर, रोली, चावल, दूध, घी, मिश्री, पाठ के लिए पुस्तक, आदि को तैयार करें।

२. पूजा का विधान: पूजा का आरंभ करने से पहले विधि और कथा को समझें। धनत्रयोदशी की पूजा में श्री धनवन्तरि जी की आराधना की जाती है, जिन्हें मान्यता है कि वे समस्त रोगों के निवारण करते है



५. धनत्रयोदशी पूजा कथा: महत्वपूर्ण कथा का विवरण

वैसे देखा जाए तो धनतेरस कि बहुत सारी कथाए प्रचलित हैलेकिन यहांपर हम एक पौराणिक कथा को इष्ट्संमत मानते है।  तो वह कथा इस प्रकार है.... 

धनतेरस से जुड़ी कथा है कि कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन देवताओं के कार्य में बाधा डालने के कारण भगवान विष्णु ने असुरों के गुरु शुक्राचार्य की एक आंख फोड़ दी थी।

कथा के अनुसार, देवताओं को राजा बलि के भय से मुक्ति दिलाने के लिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया और राजा बलि के यज्ञ स्थल पर पहुंच गए। शुक्राचार्य ने वामन रूप में भी भगवान विष्णु को पहचान लिया और राजा बलि से आग्रह किया कि वामन कुछ भी मांगे उन्हें इंकार कर देना। वामन साक्षात भगवान विष्णु हैं जो देवताओं की सहायता के लिए तुमसे सब कुछ छीनने आए हैं।  

बलि ने शुक्राचार्य की बात नहीं मानी। वामन भगवान द्वारा मांगी गई तीन पग भूमि, दान करने के लिए कमंडल से जल लेकर संकल्प लेने लगे। बलि को दान करने से रोकने के लिए शुक्राचार्य राजा बलि के कमंडल में लघु रूप धारण करके प्रवेश कर गए। इससे कमंडल से जल निकलने का मार्ग बंद हो गया।

वामन भगवान शुक्रचार्य की चाल को समझ गए। भगवान वामन ने अपने हाथ में रखे हुए कुशा को कमण्डल में ऐसे रखा कि शुक्राचार्य की एक आंख फूट गई। शुक्राचार्य छटपटाकर कमण्डल से निकल आए।

इसके बाद बलि ने तीन पग भूमि दान करने का संकल्प ले लिया। तब भगवान वामन ने अपने एक पैर से संपूर्ण पृथ्वी को नाप लिया और दूसरे पग से अंतरिक्ष को। तीसरा पग रखने के लिए कोई स्थान नहीं होने पर बलि ने अपना सिर वामन भगवान के चरणों में रख दिया। बलि दान में अपना सब कुछ गंवा बैठा। 

इस तरह बलि के भय से देवताओं को मुक्ति मिली और बलि ने जो धन-संपत्ति देवताओं से छीन ली थी उससे कई गुना धन-संपत्ति देवताओं को मिल गई। इस उपलक्ष्य में भी धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है।



६. पूजा के दौरान मंगलिक गीत और आरती

पूजा के दौरान मंगलिक गीत और आरती एक महत्वपूर्ण अंग हैं। ये गीत और आरती पूजा के विभिन्न अवसरों पर गाए जाते हैं और धनत्रयोदशी पूजा में भी इसका विशेष महत्व है। ये गीत और आरती धन, समृद्धि, और लक्ष्मी-कुबेर की कृपा को आमंत्रित करने का एक अद्वितीय तरीका हैं।
मंगलिक गीत एक प्रार्थना-प्रशंसा संगीत होता है, जो भक्तों की उम्मीद और श्रद्धा को बढ़ाता है। इसमें धनत्रयोदशी के अवसर पर लक्ष्मी-कुबेर जी की प्रशंसा की जाती है और उनकी कृपा और आशीर्वाद की अपेक्षा की जाती है। मंगलिक गीत के ध्वनि और शब्दों से यह अनुभव होता है कि देवी लक्ष्मी और भगवान कुबेर धन, समृद्धि और आर्थिक सुख की संपूर्णता को लेकर आ रहें हैं।



७. पारंपरिक भोजन: धनत्रयोदशी पर प्रस्तावित विशेष भोजन

धनत्रयोदशी परंपरागत रूप से एक विशेष भोजन के रूप में मनाया जाता है। यह भोजन धनत्रयोदशी के अवसर पर परिवार के सदस्यों के साथ साझा किया जाता है और इसे विशेष तौर पर पूजा के दौरान सेवन किया जाता है। इसका उद्देश्य धन और समृद्धि की प्राप्ति की कामना करने के साथ-साथ एक आनंदप्रद और आदर्शित भोजन का आनंद लेना है।

प्रस्तावित धनत्रयोदशी भोजन में विभिन्न प्रकार के व्यंजन शामिल हो सकते हैं। इसमें धान, दाल, सब्जियां, रोटी, रायता, पपड़, और मिठाई जैसी सामग्री शामिल हो सकती है। धनत्रयोदशी के दिन बांधी खीर और पूरी के सेवन का विशेष महत्व होता है, जो धन और समृद्धि की प्रतीक होता है। इस भोजन में विभिन्न अनाज, गुड़, घी, दूध और मिश्रण का उपयोग किया जाता है जो समृद्धि को प्रतिष्ठित करने के लिए प्रस्तुत होता है।

८. समाप्ति और आगे की प्रगति: धनत्रयोदशी पूजा का आनंद लें

धनत्रयोदशी पूजा एक प्रमुख हिंदू धार्मिक आयोजन है जो धन और समृद्धि के प्राप्ति के लिए की जाती है। इस पूजा का आयोजन करने से पहले, हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारे पास धनत्रयोदशी की पूजा के लिए सारे आवश्यक सामग्री उपलब्ध हैं।

धनत्रयोदशी पूजा की शुरुआत करने के लिए, हमें पूजा के लिए एक पवित्र स्थान का चयन करना चाहिए जहां हम पूजा के लिए एक स्थायी स्थान बना सकें। यह स्थान शुभ और निर्मल होना चाहिए। एक चौकी या पूजा मंडप का आयोजन करें जहां हम पूजा सामग्री, फूल, धूप, दीपक, और प्रसाद रख सकें।

धनत्रयोदशी पूजा की विधि के अनुसार, हमें यमदेव की पूजा करनी चाहिए। इसके बाद हम अपने पूजा सामग्री को सजाकर पूजा को पूरा कर सकते हैं। धूप, दीपक, माला, फूल, और प्रसाद को प्रयोग करके हम अपनी पूजा कर सकते हैं।



इसके अलावा, हमें समृद्धि के संकेत के रूप में कुछ चीजें खरीदनी चाहिए, जैसे कि सोना, चांदी , पूजा सामग्री, आदि। इसे हमें इस दिन मंदिर में स्थापित करना चाहिए।


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